संस्थान

भा॰ कृ॰ अनु॰ परि॰-भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान की नीव 25 अगस्त ,2014  को राँची (झारखंड) के गढ्खटंगा नामक स्थान पर  माननीय कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री  श्री राधा मोहन सिंह जी , भारत सरकार के द्वारा रखी गयी। वर्तमान में यह संस्थान आई॰ सी॰ ए॰ आर॰- आई॰ आई॰ एन॰ आर॰ जी॰ के प्रसंस्करण एवं प्रदर्शन इकाई, नामकुम, राँची के कार्यालय शिविर मे अवस्थित एवं कार्यरत है।इस संस्थान की  स्थापना इस परिकल्पना के साथ की गयी है की कृषि एवं कृषि प्रसंस्कृत उत्पादो से संबन्धित तीव्र गति से बढ़ती हुई मांगो को यह संस्थान अग्रणी आण्विक उपकरण एवं तकनीकों के द्वारा पूरा कर पाने में  हर तरह से सक्षम होगा । इतना ही नहीं,यह संस्थान कृषि क्षेत्र मे विश्व स्तरीय मानव संसाधन विकसित करने की दिशा मे भी महत्वपूर्ण कदम उठाने को दृढ़ संकल्पित है।इसके अंतर्गत कृषि जैव प्रोद्योगिकी से संबन्धित विषयों मे उच्च  शिक्षा के विभिन्न स्तरों यथा स्नातकोत्तर ,डॉक्टरेट एवं पोस्ट डॉक्टरेट पर शिक्षण एवं प्रशिक्षण देना शामिल है। ईन उदेशयों की पूर्ति के लिए संस्थान के द्वारा एक शैक्षणिक पाठ्यक्रम विकसित किया जाएगा जो लचीला ,गतिशील एवं माडुलर प्रवित्ति का होगा ताकि यह संस्थान भविष्य मे  शिक्षण,अनुसंधान एवं जैव प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों से संबन्धित विभिन्न क्षेत्रो में संबन्धित  एकेडमिया की मांग आधारित उपलब्धता को सुनिश्चित करसके ।संस्थान के सभी पादप प्रजनन कार्यक्रमों मे आण्विक मार्कर तकनीक को एक अभिवज्य एवं पूरक तकनीक के रूप में लिया जाएगा ।देशी तथा जंगली प्रजातियों का उपयोग करके लक्षण आधारित जीनोमिक संसाधनो एवं उपकरणो को विकसित किया जाएगा।इसके अलावे भारत मेँ  उपलब्ध विशाल  जैव विविधता मेँ से नए जीन , एलिल एवं प्रोमोटर को ढूँढना भी इस संस्थान की प्राथमिकता होगी।  विकास संबन्धित वांछित बदलाव लाने ,कृषि क्षेत्र मे उत्पादकता बढ़ाने एवं उत्पादन घटकों  के उपयोग की दक्षता बढ़ाने के लिए न्यूनाधिक जीन अभिव्यक्ति के उपयोग से जैव रसायनिक प्रक्रियाओं में बदलाव करना इस संस्थान के दैनंदिन अनुसंधान के अभिन्न अंग होंगे। इतना ही नहीं भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान के द्वारा एक आदर्श कृषि प्रारूप का विकास किया जाएगा जिसमे हितधारकों के पसंद का एक फायदेमंद घटक भी शामिल होगा।

पौधों, जानवरों एवं मछलियों मे होने वाले बीमारियों के सटीक पहचान के लिए आण्विक निदान एवं उनके नियंत्रण के लिए रोगनिरोधी उपायों की खोज भी इस संस्थान के प्राथमिकताओं  मे शामिल है। साथ ही तेजी से विकसित हो रही तकनीकों जैसे नैनो विज्ञान का उपयोग फसलों के उत्पादन एवं उत्पादकता में सुधार लाने के लिए किया जाएगा । इसके तहत बीमारियों एवं कीटों के प्रबंधन के लिए अतिसंवेदनशील खोज प्रणाली ,कीटनाशकों का नैनो वितरण , टीका, पोषक तत्वों /हारमोन, जीन्स आदि तत्वों को लिया जाएगा । यह संस्थान नार्स (NARS ) के तहत शुरू किए गए जैव प्रौद्यिगिकी अनुसंधान गतिविधियों के लिए एक हब की तरह कम करेगा जो जैव प्रौद्योगिकी जनित उत्पादों ,उपकरणों ,मसविदाओं ,तकनीकों ,डाटा बेस ,अनुक्रमण ,जैव सूचना विज्ञान ,सुरक्षा अध्ययन एवं ज्ञान के लिए तकनीकी सहायता एवं सेवा सुविधाएं प्रदान करेगा।